गुजरेंगे उन्ही राहों से,
जिनपे तुम चले थे कभी,
निशानिया तो मिलेंगी तेरी,
पता है मिलोगे तुम नहीं अब कभी...
जिनपे तुम चले थे कभी,
निशानिया तो मिलेंगी तेरी,
पता है मिलोगे तुम नहीं अब कभी...
धुंधले से होते जा रहे हैं सपने हवाओं में कही, शायरों के लफ़्ज़ अब हलके हो चले है...