सोच मे है मुद्दतो से,
किस बात पे ख़फ़ा होगे,
ना जाने कब तुम,
अपने ग़ुरूर का पता दोगे,
खूबसूरत हो बहुत तुम,
कहो कब दगा दोगे,
एक ही जान है मेरी,
कितनी दफ़ा लोगे..
धुंधले से होते जा रहे हैं सपने हवाओं में कही, शायरों के लफ़्ज़ अब हलके हो चले है...
No comments:
Post a Comment